श्रवण भारतीपि का 48वां वर्ष प्रवेश – समाज के लिए योगदान

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Dated: Jan 2024

श्रवण भारतीपि पत्रिका सन् 1976 से निरन्तर प्रकाशित हो रही है। विगत वर्षों में इस पत्रिका ने जैन समाज के लिए जो योगदान दिया है, वह अपने आप में एक कीर्तिमान है।

यह पत्रिका अखिल भारतीय स्तर की जैन समाज की प्रमुख पत्रिका है, जिसका पूरे भारत में प्रचार-प्रसार है। यह एक निर्भीक, निष्पक्ष और निर्लोभी पत्रिका है, जो सुसंस्कारों को प्रेरित करने वाली सैद्धांतिक दिशा प्रदान करती है।

श्रवण भारतीपि पत्रिका:

  • समाज सेवा,
  • समाज जागरूकता एवं समाज रक्षा,
  • और जैनत्व के प्रचार-प्रसार में सतत संलग्न है।

यह पत्रिका न तो व्यवसायिक है, और न ही आजीविका का कोई साधन। यह जैन संस्कृति की रक्षक, पोषक, और नैतिकता एवं आध्यात्मिक संस्कारों को प्रसारित करने वाली देशव्यापी पत्रिका है।


प्रचार और प्रसार की दृष्टि से विशेष

आजकल धाखमक, सामाजिक महोत्सवों में स्थानीय स्तर की अजैन पत्र-पत्रिकाओं में बढ़-चढ़कर विज्ञापन छपवाए जाते हैं, जबकि उनका प्रचार केवल स्थानीय संस्करण तक ही सीमित रहता है।

श्रवण भारतीपि पत्रिका में प्रकाशित कोई भी समाचार, विज्ञापन या जानकारी पूरे भारत में प्रसारित होती है।
इसलिए धाखमक, सामाजिक समारोह आदि के विज्ञापन श्रवण भारतीपि में प्रकाशित कराना अधिक लाभप्रद और प्रचार की दृष्टि से उपयोगी सिद्ध होता है।


सभी के लिए उपयोगी और लाभकारी

अतः सभी को श्रवण भारतीपि पत्रिका का उपयोग करना उपयोगी सिद्ध होगा। इससे न केवल पत्रिका के प्रकाशन में सहयोग मिलेगा, बल्कि प्रचार-प्रसार की दृष्टि से भी यह अधिक लाभकारी होगा।

प्राचीन तीर्थों की रक्षा में ‘श्रवण भारती’ पत्रिका की भूमिका प्राथमिकता से रहती है।

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